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नई दिल्ली। हॉकी के कद्दावर जादूगर मेजर ध्यानचंद को पूरा देश खेल दिवस के रूप में मनाता रहा है। 29 अगस्त 1905 को इलाहबाद के एक राजपूत परिवार में जन्में ध्यानचंद को बचपन में हॉकी से बिल्कुल जुड़ाव नहीं था। लेकिन फौज में सिपाही बनने के बाद ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने ऐसी हॉकी खेली की दुनिया उन्हें हाकी का ‘जादूगर’ कहने लगी। मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल दागे ।

यूं तो ध्यानचंद के जीवन से जुड़ी कई बातें हैं, लेकिन आपको जानकर गर्व महसूस होगा कि ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना के एक स्पोर्ट्स क्लब में उनकी खास तरह की मूर्ति लगाई गई है. इस मूर्ति की खूबी है कि इसमें ध्यानचंद के चार हाथ हैं। दरअसल, ध्यानचंद की चार हाथों वाली मूर्ति के जरिए संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि वे मैदान पर ऐसे खेलते थे मानो वे चार हाथों से खेलते हों। उनके गोल दागने की कला की दुनिया कायल थी। 1968 में भारतीय ओलंपिक टीम के कप्तान रहे गुरुबख्श सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘साल 1959 में ध्यानचंद 54 साल के हो गए थे, इसके बाद भी उनकी तेजी के सामने युवा फेल थे, कोई भी खिलाड़ी बुली में उनसे गेंद नहीं छीन सकता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए । राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज पॉर्टल का शुभारंभ किया। मोदी ने कहा कि मेजर ध्यानचंद के खेल कौशल के बूते भारतीय हॉकी में अद्भुत कारनामें हुए। “इस क्षमता के उपयोग के लिए पॉर्टल शुरू किया गया है, जो युवाओं को खेल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सही दिशा और सहयोग देगा। मोदी ने कहा “खेल के लिए शारीरिक तंदरुस्ती, मानसिक सतर्कता और व्यक्तिगत विकास जरूरी है.”।

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